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कंप्यूटर में हिंदी का प्रयोग।

इस वैज्ञानिक युग में कंप्यूटर के चमत्कार से सभी परिचित हैं। इसका जन्म और विकास अंग्रेजी भाषी देशों में हुआ। फलतः इसका लाभ अधिकतर अंग्रेजी भाषा को मिला। इसकी तकनीकी शब्दावली भी अंग्रेजी भाषा में है। भारत में प्रवेश के समय बहुत-सी सरकारी नोटिस और बिल अंग्रेजी में आने लगे तथा हिंदी की प्रगति रुक-सी गई थी। भारत सरकार की राजभाषा विभाग सक्रिय होकर भारतीय वैज्ञानिकों का ध्यान इस ओर आकृष्ट किया। परिणामतः बिड़ला प्रौद्योगिक तथा विज्ञान संस्थान पिलानी(राजस्थान)और बी,एस,एम, प्रोडक्ट्स ने पहला द्विभाषी यह सॉफ्टवेयर"सिद्धार्थ" नाम से निर्मित किया। इसमें अंग्रेजी और हिंदी के साथ तमिल में भी कुंजीपटल था तमिल में भी कुंजी-पटल था। तत्पश्चात आई, आई,टी कानपुर ने हिंदी कंप्यूटर निकाला। फिर तो हैदराबाद से लिपी नामक त्रैमासिक कंप्यूटर भी मार्केट में आ गया। इन दिनों दर्जनों बोर्ड इस दिशा में सक्रियता दिखला रहे हैं। प्रायः ये की-बोर्ड द्विभाषी हैं। इससे सरकारी कार्यालयों और सार्वजनिक प्रतिष्ठानों को बहुत लाभ हुआ क्योंकि हिंदी के साथ अंग्रेजी में तो हमारी राजभाषा बनी क्योंकि हिंदी के साथ अंग्रेजी में तो हमारी राजभाषा बनी बैठी। इन आविष्कारों से भाषाओं में एक साथ कार्य होने लगा और बाबू तथा तंकको की सुविधा हो गयी। पहले की अपेक्षा अब हिंदी का व्याकरण अधिक होने लगा है। कंप्यूटर में हिंदी के अनुप्रयोग से मुद्रण और प्रकाशन में क्रांति-सी आ गई। पहले हाथ से कंपोजिंग कराया जाता था तो काम रुका रहता था। छपाई एक साथ नहीं हो पाती थी। टाईपों के केस बनवाने पढ़ते थे। हिंदी धीरे-धीरे मशीन की दासी होती जा रही थी। सुधार की मांग होती थी। अब कंप्यूटर के जादू से स्क्रीन पर सब कुछ आ जाता है। फ्लॉपी में भरा जाता है। जब चाहे और जितना चाहे प्रिंटर पर और फोटो प्रेस पर छाप लिया जाता है। हिंदी का कंप्यूटर की-बोर्ड बहुत विस्तरित है। इसमें नए-पुराने सभी अक्षर के प्रतीक होते है। विशेषकर संयुक्त अक्षरों की तो कोई कमी नहीं है। संयुक्त अक्षरों में जो तथाकथित सुधार किए गए थे। संस्कृत संस्कृत में विद्यमान और विधार्थी सब विक्षुब्ध थे। कंप्यूटर के आगमन और इस दिशा की वैज्ञानिकता से सभी संतुष्ट हो गए। कंप्यूटर के अक्षर भी बहुत सुंदर है। अंग्रेजी के अक्षर तो आज भी वैसे ही सीधी रेखा वाले हैं,परंतु हिंदी की सीधी रेखा में और टेढ़ी रेखा में सुंदरता देखते ही बनती है। देवनागरी वर्णमाला का क्रम वैज्ञानिक होने के साथ-साथ कंप्यूटर के प्रोग्राम में आसानी से सिद्ध होते हैं। सुंदर प्रकाशन से हिंदी पुस्तकों के प्रति पाठक आकर्षित हो रहे हैं तथा इसकी बिक्री भी बढ़ती जा रही है। यह सपना भी देखा जा रहा है की कंप्यूटर में किसी पुस्तक का विषय भर दिया जाए तथा फिर अपनी इच्छा अनुसार से सुना सुनाया जाए। कंप्यूटर एक भाषा से दूसरी भाषा में आसानी से अनुवाद कर देता है ।एक व्यक्ति का भाषण एक साथ पांच-पांच भाषाओं में अनुवादित हो जाता है। दुभाषी अनुवाद की प्रक्रिया से शब्दकोश तैयार होने लगता है। संपादन और मुद्रण में समय इससे बहुत कम लगता है तथा काम भी सुंदर और शुद्ध हो जाता है। इन पक्षों को देखकर पाठक समुदाय निरंतर कंप्यूटर की ओर आकर्षित होते जा रहे हैं।

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